सुरेश रैना / Suresh Raina एक भारतीय प्रोफेशनल क्रिकेटर है। वे बाएँ हाथ के मध्यक्रम बल्लेबाज है और कभी-कभी वे ऑफ-स्पिनर बॉलर भी बन जाते है। इसके साथ ही वे वर्ल्ड क्रिकेट के बेहतरीन फील्डरो में से एक है। डोमेस्टिक क्रिकेट में वे उत्तर प्रदेश की तरफ से खेलते है और इंडियन प्रीमियर लीग में वे गुजरात लायंस के कप्तान भी है। उन्होंने कुछ समय के लिये भारतीय टीम की कप्तानी भी की है और सबसे कम उम्र में कप्तानी करने वाले वे दुसरे खिलाडी भी है। तीनो इंटरनेशनल फॉर्मेट में शतक मारने वाले दो भारतीयों में से सुरेश रैना एक है। वे एक ताबड़तोड़ टी20 बल्लेबाज माने जाते है। आक्रमक अंदाज़ की वजह से उनका टेस्ट करियर ज्यादा समय तक नही चल पाया।
सुरेश रैना की जीवनी / Suresh Raina biography in Hindi
रैना ने 2005 में 19 साल की उम्र में श्रीलंका के खिलाफ एकदिवसीय मैच में डेब्यू किया था। उन्होंने टेस्ट डेब्यू इसके पाँच साल बाद किया था, 2010 में इसी टीम के खिलाफ उन्होंने टेस्ट डेब्यू किया था। टेस्ट में अपने डेब्यू मैच में ही उन्होंने शतक मारा था। 2011 में विश्व विजेता इंडियन टीम के वे सदस्य थे।
सुरेश रैना के पिता मुर्दानगर की ऑर्डनेन्स फैक्ट्री में काम करते है जबकि उनकी माता का नाम परवेश रैना है। वे उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद के शहर के राजनगर में रहते है। उन्हें तीन छोटे भाई दिनेश रैना, नरेश रैना और मुकेश रैना और एक बड़ी बहन रेनू भी है। सुरेश रैना का एक आर्टिकल 2012 में आयी किताब राहुल द्रविड़ : टाइमलेस स्टील में भी प्रकाशित किया गया था।
◘ करियर
सन 2000 में रैना ने क्रिकेट खेलने का निर्णय लिया और तुरंत अपने घर मुर्दानगर, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश चले गए। और वहाँ वे विशेष गवर्नमेंट स्पोर्ट कॉलेज में दाखिल हुए। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश से अंडर-16 के कॅप्टन बने और सन 2002 में इंडियन सेलेक्टर्स की नजरे उनपर पड़ी। और 15 साल की उम्र में ही उनका सिलेक्शन अंडर-19 की टीम के लिये कर लिया गया था और अंडर-19 मैचो में उन्होंने 2 अर्धशतक भी बनाये। इसके बाद अंडर-17 की टीम के साथ वे श्रीलंका के टूर पर गए थे और जीतकर वापिस लौटे। इसके बाद उन्होंने आसाम के खिलाफ फरवरी 2003 में रणजी डेब्यू किया था, उस समय उनकी उम्र केवल 16 साल की ही थी। इसके बाद उन्होंने अंडर-19 की टीम के साथ पाकिस्तान टूर किया। और उनके प्रदर्शन को देखते हुए सिलेक्टर ने उनकी नियुक्ति 2004 के अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिये की गयी थी, इस वर्ल्ड कप में उन्होंने 3 अर्ध शतक लगाये थे, जिनके एक बार उन्होंने 38 गेंदों पर 90 रन भी बनाये थे। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट अकैडमी में प्रशिक्षण पाने के लिये उन्हें बॉर्डर-गावस्कर स्कालरशिप भी मिली थी। इसके बाद 2005 के शुरू में ही उन्होंने लिमिटेड-ओवर की श्रेणी में डेब्यू किया था और उस सीजन में उन्होंने 53.75 के एवरेज से 645 रण बनाये थे।
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दोस्तों आपको मेरी ये पोस्ट कैसे लगी मुझे कमेंट में जरूर बताये आप मुझे जरूर भेजे मैंने आपको आगे भी ढेर साडी जानकारी देता रहूंगा आप मेरे ब्लॉग रोजाना देखते रहे शुक्रिया
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